उस स्त्री से प्रेम मत करना
जो सवाल पूछती हो,
जो हर बात को बस मान लेने के बजाय
समझना चाहती हो।
उस स्त्री से प्रेम मत करना
जो किताबों में खो जाती हो,
और फिर उन्हीं किताबों से
अपनी दुनिया गढ़ लेती हो।
उस स्त्री से प्रेम मत करना
जो अपने आँसुओं से शर्मिंदा न हो,
और अपनी मुस्कान को भी
किसी मुखौटे की तरह न पहनती हो।
उस स्त्री से प्रेम मत करना
जो अकेले चलना जानती हो,
जिसने टूटकर भी
खुद को जोड़ना सीख लिया हो।
और यदि कर ही बैठो
ऐसी स्त्री से प्रेम...
तो याद रखना,
वह तुम्हारी ज़िंदगी में रहे या न रहे,
तुम्हारा हाथ थामे या छोड़ दे,
तुम्हें चाहे या भूल जाए...
लेकिन वह तुम्हें
पहले वाला इंसान कभी नहीं रहने देगी।
क्योंकि कुछ लोग प्रेम नहीं करते,
वे हमारी आत्मा पर
अपनी उपस्थिति लिख जाते हैं।