✨ संविधान दिवस पर विशेष ✨
आज संविधान दिवस है, भारत के आत्मसम्मान और लोकतंत्र की नींव को सलाम करने का दिन। यह वही किताब नहीं, यह हमारे हक़ की आवाज…
आज संविधान दिवस है, भारत के आत्मसम्मान और लोकतंत्र की नींव को सलाम करने का दिन। यह वही किताब नहीं, यह हमारे हक़ की आवाज…
"नाराज़गियाँ और रिश्तों की चुप आवाज़" (By Rebel Pen) नाराज़ रहकर हम अक्सर अपनों से दूरी तो बना लेते हैं... प…
पापा के नाम — Father's Day पर "कंधे पर बिठाकर दुनिया दिखाने वाले, अब खुद आसमान बन गए हैं। जिनकी डाँट में भी द…
मिट्टी की खुशबू, अपनापन है साथ, होली में रंगे, ये भाईचारे की बात। रंग नहीं, कीचड़ सही, पर प्यार गहरा, यारी का रिश्ता …
स्याही से लिखी बगावत की बातें, हर अक्षर में छुपी हैं सौ सौ सौगातें। न झुकी है, न रुकी है ये कलम, हर दौर में कहती रही अप…
स्याही में बसी है बगावत की आग, हर शब्द कहे एक नई फ़रियाद। न जंजीरों की हद, न सीमाओं का डर, कलम उठी तो बदल देगा यह स…
गाना लिखना एक रचनात्मक प्रक्रिया है जो आपकी भावनाओं, विचारों और कल्पना को संगीत और शब्दों के माध्यम से व्यक्त करती है।…
रंगों की बहार आई है, पर दिल पे अंधेरा छाया है। गली-गली खुशियाँ बिखरी हैं, मगर मेरी मन्जिल खोई है। अबीर-गुलाल उड…
याद आते है पुराने दिन अब भी मिलने आती हैं यादें अक्सर कैसे कहूँ तुम्हें कि वो अक्सर लाती है तुम्हें मेरे पास वो बात बात…
कुम्भ के मेले में जुटे हैं लाखों प्राण, हर कोई खोज रहा है मोक्ष का ज्ञान। गंगा तट पर बसा है अमृत का सागर, पर कि…
कुंभ के घाट पर जब हुआ हादसा, लहरों में डूब गई उम्मीदों की कश्ती। कितने सपने टूटे, कितने दिल रुके, गंगा की गोद म…
कुछ कहो तुम तो मैं तुमसे कहूं कुछ, कुछ सुनो तुम तो मैं तुमको सुनाऊं कुछ, कुछ लिखो तुम तो मैं तुमको पढूं कुछ कुछ पढ़ो …
कम शब्दों में ज़िंदगी को लिखना आता है हमें, अपनी कविताओं में तुमको समेटना आता है हमें , माना कि ख़ुद की उलझनों में उलझ…
दूर आसमाँ में छुप गई हो, माँ। मुझसे दूर क्यों हो गई हो, माँ ? सबकुछ है, आप नहीं हो, माँ। बेरंग हुई जिंदगी, सब खो गया…
मैं तो आ जाऊँगा तुमसे मिलने तुम मेरे लिए वक़्त निकाल पाओगी क्या जो किए हैं वादे तुमने उन्हें निभाओगी क्या जानू मैं…
चाहता हूँ... ज़िन्दगी के धागे सुलझाना चाहता हूँ। किसी बिखरे हुए शख्स के पास जाना चाहता हूँ। मेरे सीने का जो दर्द पढ़ ले, …
सौ फीसदी सच सौ फीसदी सच । तुम्हारी क़सम। पर सच तो सच होता है! छब्बीस या चौहत्तर फ़ीसदी क्या होता है ? और ये तुम प्रतिशत…
यह ताज़ी हवायें, यह खुला मौसम, कुछ कह रहा है, आ दिल मेरे सुन। क़ुदरत को मिली नयी ज़िंदगी जैसे, हवाओं ने छेड़ी जैसे…
है ये कैसा पैसा क्या कहें की क्या है पैसा बिन इसके कुछ नहीं रहता समझो तो सबकुछ नहीं तो कुछ भी नहीं इसके जैसा है ये कै…
ऐ चाँद ऐ चांद की किरणें जाओ ना, तुम उस को छू कर आओ ना, वो कब कब क्या क्या करती है, वो जगती है या सोती है, वो किस से बा…
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